अधूरी जिन्दगी का पूरा किस्सा हो तुम,
मेरी ख़ुशी का अब पूरा हिस्सा हो तुम।।
:- चन्द्र प्रताप सिंह(आर्यन)
अधूरी जिन्दगी का पूरा किस्सा हो तुम,
मेरी ख़ुशी का अब पूरा हिस्सा हो तुम।।
:- चन्द्र प्रताप सिंह(आर्यन)
जिन्दगी मे जब, जैसे जिससे भी मिलो बस बिना बात के मुस्कुरा कर मिलो।
कुछ तो आपकी खुशी देख मुस्कुरा देंगे तो कुछ पागल समझ के…..! लेकिन मुस्कुराना तय है ।
:- चन्द्र प्रताप सिंह।
मैने लिखा दिल से दिल को ये पैगाम
गुमनामी मे एक चिट्ठी गुमनाम
बिना लिखे पता वो चिट्ठी मैने डाक मे डाल दिया
सोचा होगा कोई शहर मे मुझ जैसा गुमनाम,
जिस तक ये चिट्ठी चलकर पहुँच जायेगा!
घुम फिर के चिट्ठी वापस एक दिन मेरे दर पे आ गयी,
डाकियां बोला—–
हे…. गुमनाम मुसाफिर, तेर लिये एक गुमनाम सी चिट्ठी आ गयी।
२७/०१/२०१८
– चन्द्र प्रताप सिंह
तुझमें और मुझमें किस बात मे ठनी सी है,
तु मेरी होकर भी क्यों अजनबी सी है.. जिन्दगी.!
:- चन्द्र प्रताप सिंह
कभी आराम से चलता हूं, कभी अयाम को चलता हूं,
मै राह का हूं वो मुसाफिर जो बीना काम के चलता हूं!
:- चन्द्र प्रताप सिंह
गुजर गये बगल से पहचाने भी नही,
वो ही कभी जो अपने थे बेगाने भी नही ।
चन्द्र प्रताप सिंह
अगर हालात, लम्हात और जज्बात समझा जाये तो खुशी मनाने के लिये कोई खास पल या दिन नही ढुढा जायेगा बस हर पल मे खुशी मनाने का एक जरिया नजर आयेगा ।
सब पुछे बोल देरे दिल मे क्या है भरा?
मै था तो समन्दर सा,
फिर भी बोला जैसे कोई खाली घड़ा ।
:-
चन्द्र प्रताप सिंह
अलग सी है ये दुनिया मेरी,
अलग अन्दाज से चलता हूं।
सब हिसाब से चलते है,
मै बेहिसाब चलता हूं ।
चन्द्र प्रताप सिंह
नारियल जैसा होता है बाप का किरदार,
ऊपर से कठोर अन्दर से कोमलता बेशुमार ।।
चन्द्र प्रताप सिंह