# July 1, 2017 / Deep Singh / Leave a comment हाल-ए-दिल अजनबीओ से यूँ ज़ाहिर नहीँ करते गगन, अक़्सर खुद का ही लोगों की जबाँ से मज़ाक़ बनते सुना है ! -दीप सिंह
शेर.. June 29, 2017 / Deep Singh / Leave a comment दिल-ए-नादान भूल चुका है अब रास्ता मयखानों का, जबसे इक़रार मेहबूब की नज़र ने रोज़ मिलने का किया । -दीप सिंह