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हाल-ए-दिल अजनबीओ से यूँ ज़ाहिर नहीँ करते गगन,
अक़्सर खुद का ही लोगों की जबाँ से मज़ाक़ बनते सुना है !

-दीप सिंह

शेर..

दिल-ए-नादान भूल चुका है अब रास्ता मयखानों का,
जबसे इक़रार मेहबूब की नज़र ने रोज़ मिलने का किया ।

-दीप सिंह

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