Kisaan ki Byathaa

Kisaan ki Byathaa

आज अन्नदाता किसान मानसून से जुआ खेलते-खेलते अपना धैर्य खोते जा रहे हैं।उनमें से अधिकतर कर्ज में डूब जानवर से भी बदतर जिंदगी जीने को बेबस हैं।उन्हीं किसानों की बिबसता दर्शाने का एक छोटा प्रयास--- आसमान में बादल छाये,गुजर गया अब जेष्ठ,बैल हमारे बूढ़े हो गए,जोत रहे सब खेत, धनियाँ कैसे बुआउँ धान,कैसे जोतुं खेत,२ … Continue reading Kisaan ki Byathaa

Waham/वहम

Waham/वहम

ना लडनेवालो की कमी, ना लडानेवालो की,जंग एक बार कभी,ठानो तो सही।ढ़ूँढ़ रहे कहां दोस्त और दुश्मन,सब तो हैं तेरे घर में,चश्मा वहम का उतारो तो सही।दूर होते गए मंजिल,जो करीब थे कभी,मृग मरीचिका से स्वयं को निकालो तो सही,है वक्त प्रतिकूल, अनुकूल भी जरूर होगा,निकलेगा राह,निकालो तो सही,चश्मा वहम का उतारो तो सही।!!!मधुसूदन!!!

BULLDOZER/बुलडोजर

BULLDOZER/बुलडोजर

किसी का आलीशान मकान,किसी का चमकता दुकान, किसी का अम्बर ही छत,फुटपाथ ही सब, जो देता रहा दो वक्त की रोटी, जो करता रहा जुगाड़, बिटिया की शादी का, पढ़ाई का,दवाई का, वो फुटपाथ आज रह गया, सिर्फ सियासत का ग्रास होकर, जिधर देखो उधर सिर्फ चलते बुलडोजर। देश कर रहा तरक्की, खुश हूँ विश्व … Continue reading BULLDOZER/बुलडोजर

TAPASYA/तपस्या

TAPASYA/तपस्या

दिल की बगिया से हवा चली भावनाओं का,जिसके कण कण में सिर्फ तेरा नाममन लिखने को आतुर,देने को उत्सुकतुमकोकुछ पैगाम,दौड़ चली कलम,और बरसने लगे शब्द,कोरे कागज़ देखने में रंगीन हो गए,सच कहें तो दर्द में मेरे गमगीन हो गए,तपस्या ही है,चाहतगुलशने-दिल महकाने कीजो कभी नहीं लौट सकता उसेवापस बुलाने की, उसे वापस बुलाने की|!!! मधुसूदन … Continue reading TAPASYA/तपस्या

Naya Saal Naya Sawera

Naya Saal Naya Sawera

भारतीय नववर्ष, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रमी संवत् 2077 की आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ ।

“Happy New Year”

Madhusudan's avatarMadhusudan Singh

Image credit: Google
है दास्ताँ सीखा गयी गुलामी बर्षों की,
अपना असर दिखा गयी गुलामी वर्षों की||
शुक्ल प्रतिपदा प्रथम दिन,
है चैत्र मास का ख़ास,
इसी दिन से ब्रम्हा ने की,
सृष्टि की शुरुआत,
इस दिन हम नववर्ष मनाते,
हिन्द को अपना खूब सजाते,
मगर इसे भी मिटा रही गुलामी वर्षों की,
अपना असर दिखा गयी गुलामी वर्षों की|1
सर्दी का दिन ढलते साल का,
अंतिम जश्न मनाते,
फागुन मास का एक महीना,
रंग-अबीर उड़ाते,
गले लगाते एक दूजे को,
जश्न मनाते पूरी रात,
साफ़-सफाई गलियों की कर,
करते नववर्ष की शुरुआत,
मगर मिटा दी रश्म सभी गुलामी वर्षों की,
अपना असर दिखा गयी गुलामी वर्षों की|2
माह जनवरी नया साल का,
पतझड़ लेकर आती,
चैत्र महीना नया साल,
नव कोपल है दिखलाती,
जहाँ की है नववर्ष जनवरी,
शायद वहां वसंत,
भारत की नववर्ष चैत्र है,
होती यहाँ उमंग,
हरियाली धरती पर होती,
फूल की खुशबु होती,
फागुन,चैत्र का…

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विकास की दौड़ में,बहुत दूर हो गए थे अपनो सेऔर गाँव से,आज दोनों की याद दिलाई है,एक वायरस सब कहते कोई कोरोना आई है।कोई भी लड़ाई लड़ने को,घर से बाहर निकलते थे,आज दरवाजे बंद घरों में रहते हैं,हाथ मिलाना,गले लगाना,पास बैठ मुश्किल बतियाना,खुली हवा में साँसे लेने पर भी सामत आई है,एक वायरस सब कहते … Continue reading

मेरी माँ

मेरी माँ

दूर चाँद को हमें दिखाती,उनको मामा हमें बताती,गोद बिठाकर बड़े प्यार से बहलाती थी मोरी माँ,भरी कटोरी दूध-भात की याद अभी भी लोरी माँ।याद हमें जब रूठ गया मैं,कैसे हमें मनाई थी,चाँद हमें जब नजर ना आए,कैसी कथा बनाई थी,मैं तुम में तब डूब गया था,चाँद को उस पल भूल गया था,भूल गया जिद याद … Continue reading मेरी माँ