
समुद्र की गहराइयों में गोते लगाना
मैंने ऊंची लहरों से लड़ना सीखा है
ख्याल जो आए मन में टूट जाने का
मैंने उस ख्याल को ढृढ़ता से हराना सीखा है ।
नावों में बैठकर तो पार लग जाए
पर तैरकर मंज़िलें पाना सीखा है
दिल में ग़मों का साया भी हो तो क्या
उस दिल को चुप कराना सीखा है ।
वक़्त की धार का कोई मोल नहीं
लेकिन उसी वक़्त को मैंने बदलते देखा है
अब जाकर अंधेरों में भी
लौ जलाना सीखा है।
आंसूओं के ऊंचे शिखरों पर चढ़कर
आंखों को सुखाना सीखा है
मैंने सीने में छुपे दर्द को
अपने अंदर ही रखने का बहाना सीखा है।
चिराग़ों को बार बार भर
उन्हें जलाते रखना सीखा है
मैंने खुद से ही हारकर
खुद को जीतना सीखा है।
कई बार जब अफ़सोस के पल
घेर लेते हैं मन को
इन पलों को चुपके से भगाना सीखा है
मैंने अपनों की खुशियों के लिए
खुद को डुबाना सीखा है ।
सूखी सी बंजर ज़मीन पर भी
फूल खिलाना सीखा है
मैंने सोए हुए अरमानों को
फिर से जगाना सीखा है।
आज भी खड़े रहना है चट्टानों सा
खुद को ये समझाना सीखा है
चाहे जितनी मुश्किलें आएं
पार लगाना सीखा है।
© mahimashines at My Heart Says….







