कश्मकश ज़िन्दगी की
कहाँ तोह नंगे पांव पगडण्डी पर दौड़ जाना और अब उन्ही रास्तों की तरफ ना देखना अज़ीब सी कश्मकश है ज़िन्दगी की.. कुछ ना होने पर भी दिल खोल कर हँसना सब कुछ होने पर हँसी का ग़ुम हो जाना अज़ीब सी कश्मकश है ज़िन्दगी की.. रोज़ शाम पड़ोस के बग़ीचे से आम तोड़ कर […]
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