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विचारों की उधेड़बुन ……..

कुछ विचारों की उधेड़बुन .....

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Some sunrays…….

Some sunrays, some clouds………. Some Sunrays , some clouds, Some Drop of rain ,some white blue sky , These all are celebrating Monsoon with blowing wind and with kookoo songs , Some Greenery of those Garden , Some Tulip flowers they wants those who are enjoying and Dancing in Rain, From my Balcony ,I canपढ़ना जारी रखें "Some sunrays……."

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एक लड़की …..

एक लड़की ....

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पाल्गढ़ की घटना पर मौन रहने वाले हिन्दुओं , कल किसी और घटना का जिम्मेदार किसी और को मत ठहराना , तुम्हारी चुप्पियों का सबब ही है , के ऐसी घटनाएँ बदस्तूर जारी हैं , आज की घटना का प्रतिबिम्ब ह्रदय पर ऐसा छपा है , ऐसा आघात है के शब्दों में बयां भी न हो सकता , आज पाल्गढ़ में केवल साधू संतों की ही हत्या नही हुई , मन को विचलित करने वाली भयावह वारदात है, कोई है जो सवालों का जवाब देगा, कोई है जो कुछ कहेगा , आशा प्रतीत तो हो रही पर फिर से मन कचोटता है, क्या बीती होगी उस सत्तर साल के बुजुर्ग संत पे , वो संत तो पुलिस के पास सहयता मांगने ,भीड़ से बचने के लिए , ही तो गया होगा ,वो संत ऐसी न्रीशंश घटना को कब भाप पाया होगा , वो सत्तर साल का संत कब सुनियोजित ,प्रायोजित भीद्तंत्र के आगे हारी हुई पोलिस के करतूतों को जान पाया होगा , पुलिस तो लाचार बेबस बुजुर्ग संत को भीड़ के हवाले कर आई , जहाँ खुद को मनुष्य कहलाने का हक खो देने वाले लोग , जाने किसके इशारे पर ताड़तोबाड़ लाठियों से वार शुरू कर देते हैं , जान निकल जाने तक बेरहमी से उन वृद्ध सधुयों को पीटते हैं , लहुलुहान वयोवृद्ध वो महात्मा प्राण त्याग देता है , पुलिस महकमा अब भी खुद को दोष नही देता है , कुछ राजनीतीक लोग टीवी डीबेट में उलजुलूल तर्क देते है , कुछ जाती विशेष वर्ग की दुहाई देते हुए , खुद को महान बताते हैं , जाने कहाँ से इश्वर ऐसी घटनाओं को भारत में ही घटित होने देता है, दुनिया का कोई देशं नही जहाँ से व्योवृध्ह सज्जन संतों की हत्या की खबरें आती हों , हम कौन से भारत में रह रहे हैं , आज महाराष्ट्र की घटना ,उन संतों की हत्या की निंदा तक ही सिमित नही रही , एक बहोत बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा क्र गई है , अब ये प्रश्चिन्ह कौन किसके ऊपर लगाता है ,क्यूँ लगाता है , इससे उन महात्माओं को तो न्याय नही मिलेगा, | ॐ शांति पंक्तियाँ मैंने स्वयं लिखी है ,बेवजह किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का कोई मकशद नही | जय हिन्द ,

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My New Website

Please visit My website for my new blog's http://www.smritisnehablogs.com And like & share it.   Thank You 🙂

न जाने क्यूं वक़्त को खुद पे इतना ऐतबार हो गया ,

न जाने क्यूं वक़्त को खुद पे इतना ऐतबार हो गया , रुक गए थम गए से वक़्त को , दुनियां की आबो हवा को अपनी घड़ियों पलछिन में वक़्त के मुताबिक ही , खुद तक कैद करने का ये वक़्त ही गुनाहगार हो गया , तामाम किस्से कहानियां अब लोग बना रहे हैं ,पढ़ना जारी रखें "न जाने क्यूं वक़्त को खुद पे इतना ऐतबार हो गया ,"

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